Monday, 1 July 2019

खंडहर

खंडहर हो चुका है
तुम्हारे दिल का मकान
छतें दीवारें रोशनदान टूट रहे हैं
नूनी झड़ रही है
और तुम बात करते हो
गुलाब बेला हरसिंगार के फूलों की
जो तुमने आंगन में बोए थे
किसी समय
अंदर की अखंडता से
बाहर भी खंडहर हो चुका है

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