खंडहर हो चुका है तुम्हारे दिल का मकान छतें दीवारें रोशनदान टूट रहे हैं नूनी झड़ रही है और तुम बात करते हो गुलाब बेला हरसिंगार के फूलों की जो तुमने आंगन में बोए थे किसी समय अंदर की अखंडता से बाहर भी खंडहर हो चुका है
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