तुम्हारी देह में
एक नहीं अनेकों लाशों के ताबूत
कब्रों में दफनाए हुए हैं
मरे हुए सपनों की टूटी-फूटी क्षीण चाहतों की अतृप्त इच्छाओं, कामनाओं की
एक नहीं अनेकों लाशों के ताबूत
कब्रों में दफनाए हुए हैं
मरे हुए सपनों की टूटी-फूटी क्षीण चाहतों की अतृप्त इच्छाओं, कामनाओं की
अपनी बेरोजगारी की
अविवाहित युवा होती बहन की शादी
न कर पाने की
बूढ़े बीमार माता-पिता के
इलाज न करवा पाने की
ऐसे ही हर रोज कोई ना कोई लाश बढ़ जाती है और तुम्हारे शरीर के श्मशान में
एक नया ताबूत कब्र में दफना दिया जाता है
हो सकता है इतनी कब्रें बढ़ जाएं
कि देह छोटी पड़ जाए।
अविवाहित युवा होती बहन की शादी
न कर पाने की
बूढ़े बीमार माता-पिता के
इलाज न करवा पाने की
ऐसे ही हर रोज कोई ना कोई लाश बढ़ जाती है और तुम्हारे शरीर के श्मशान में
एक नया ताबूत कब्र में दफना दिया जाता है
हो सकता है इतनी कब्रें बढ़ जाएं
कि देह छोटी पड़ जाए।
निर्मला सिंह
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