Thursday, 4 July 2019

ये क्या हो गया?

रात-रात भर में झर गए
इंसान सूखे फल, फूल, पत्तों से
आती रहीं गोलियों की आवाजें धाय-धाय
फिर छा गया सन्नाटा
बाद में
आवाजें हवाओं की और सीटियां पुलिस वालों की सुनाई देने लगी कानों को
छत पर जाकर देखा
तो पता चला झगड़ा करवाया धर्मों के ठेकेदारों ने और दावत दी कुत्तों को धरती के
आकाश के चील-कौवे और वाजों को
लेकिन बंद कमरों में
हो रही थी सभाएं
उन्हीं धर्मों के ठेकेदारों की
दावतें, मदिरा और गोश्त की
जल रहे थे घर और दुकानें मासूमों के।

निर्मला सिंह

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