Thursday, 4 July 2019

बोनसाई


















तो तुमने! काट-छांट ही लिया
एक वृक्ष की जड़ों, डालियों को
और बना दिया बोनसाई
जिसके नीचे ना धरती है अपनी
न आकाश अपना
जो शोभा है
ड्राइंग रूम
और बरामदों की

निर्मला सिंह

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