बहुत पीड़ा होती है
कंपकंपाता है, थरथराता है दिल
बहते हैं आंखों से आंसू
छलक आती है माथे पर पसीने की बूंदें
अंतर्मन चीत्कार करता है
प्रसव वेदना की भांति
जब होता है
एक कविता का जन्म
एक कहानी का जन्म
कंपकंपाता है, थरथराता है दिल
बहते हैं आंखों से आंसू
छलक आती है माथे पर पसीने की बूंदें
अंतर्मन चीत्कार करता है
प्रसव वेदना की भांति
जब होता है
एक कविता का जन्म
एक कहानी का जन्म
निर्मला सिंह
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