Monday, 1 July 2019

मैं एक औरत हूं

जो आदमी
मुझे निचोड़ना चाहते हो
गीले कपड़ों की तरह
और धूप में पड़ी रस्सी पर
फैलाना चाहते हो।
तुम मुझे सड़क पर पड़ी मिट्टी की तरह
उछालना चाहते हो।
लेकिन मैं गीली हूं
गीली ही रहूंगी

बदमिजाज हवाओं का
नहीं होगा मुझ पर असर
एक शिला हूं
एक चट्टान हूं
जो है हवा, धूप, शीत, बरखा से
बेअसर
मजबूत।

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