जो आदमी
मुझे निचोड़ना चाहते हो
गीले कपड़ों की तरह
और धूप में पड़ी रस्सी पर
फैलाना चाहते हो।
तुम मुझे सड़क पर पड़ी मिट्टी की तरह
उछालना चाहते हो।
लेकिन मैं गीली हूं
गीली ही रहूंगी
बदमिजाज हवाओं का
नहीं होगा मुझ पर असर
एक शिला हूं
एक चट्टान हूं
जो है हवा, धूप, शीत, बरखा से
बेअसर
मजबूत।
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