Monday, 1 July 2019

चादर

एक चादर बुनी थी
शहीदों ने
आज़ादी से पहले
उत्तर से दक्षिण
पूर्व से पश्चिम तक
बिछाया था उसे

काढ़े थे उस पर मानवता के बेल बूटे
रंगा था उसको देश भक्ति के रंग में
लेकिन आप राजनीति और समाज के
बदनीयत मौसम से
तेज हवाओं से तार-तार होने लगी है
तो बचाने के लिए
जरूरत है
देश भक्त नौजवानों के हाथों की
जो चादर को रफू कर सकें

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