Monday, 1 July 2019

सन्देश

तुम!
एक चांद, सूरज या मशाल न बन सके
तो कच्ची माटी का
दीया ही बन जाओ
मोहब्बत का, प्यार का
और भगा दो
नफरत का अंधेरा।
तुम न बन सके फूलों की कतार या गुलशन
तो केवल
बन जाओ फूल एक
अमनो अमान का,
सुख-शांति का
तुम ना बन सके
सागर या नदी
तो बन जाओ
एक बूंद विश्वास की
तुम न बन सके
सड़क, गली, दोराहा, चौराहा
तो बन जाओ पगडंडी
इंसानियत की।

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