Tuesday, 2 July 2019

दिल करता है

दिल करता है
आंचल भर-भर
धूप सुनहरी लाऊं
मन सदन के कोने-कोने
मैं उसको बिखराऊं
दिल करता है
श्वेत चांदनी
मुट्ठी भर भर लाऊं
अंतरमन के प्रांगण में हर रात फैलाऊँ
तो दिन-रात
सत्यम शिवम सुंदरम
का उजास हो जाए
निर्मला सिंह

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