वह आया था
चला गया
पलभर में ही दृष्टि मार्ग से
अंतःस्थल में प्रवेश कर गया
चला गया
पलभर में ही दृष्टि मार्ग से
अंतःस्थल में प्रवेश कर गया
तब मैं कुछ ना बोली
अब बोलने को
बहुत कुछ दे गया
उसकी दृष्टि में ही
संपूर्ण ब्रह्मांड था
वह दृष्टि से ही
सम्पूर्ण शब्दावली बांच गया।
अब बोलने को
बहुत कुछ दे गया
उसकी दृष्टि में ही
संपूर्ण ब्रह्मांड था
वह दृष्टि से ही
सम्पूर्ण शब्दावली बांच गया।
निर्मला सिंह
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