Saturday, 29 June 2019

औरत

उसमें एक नहीं
चारों दिशायें हैं
जब उठती है तब पूरब
जब सोती है तब पश्चिम
दिन भर खटती रहती है
सुबह से शाम तक
उत्तर से दक्षिण
पूरब-पश्चिम
सृष्टि के इस छोर से
उस छोर तक
वह कोई और नहीं
एक औरत है
मां, बहिन, पत्नी, बेटी।

निर्मला सिंह

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