उसमें एक नहीं चारों दिशायें हैं जब उठती है तब पूरब जब सोती है तब पश्चिम दिन भर खटती रहती है सुबह से शाम तक उत्तर से दक्षिण पूरब-पश्चिम सृष्टि के इस छोर से उस छोर तक वह कोई और नहीं एक औरत है मां, बहिन, पत्नी, बेटी।
निर्मला सिंह
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