मुझमें और तुममें
फ़र्क़ इतना है कि तुम फूल बनना चाहते हो
और मैं तुख्म,
कि तुम चांद, तारा, सूरज बनना चाहते हो
और मैं गगन,
कि तुम गुम्बद, महल की मीनार बनना चाहते हो
और मैं नींव,
कि तुम कविता, गीत, ग़ज़ल, कहानी, उपन्यास बनना चाहते हो
औऱ मैं अक्षर
कि तुम नदी, सागर बनना चाहते हो
और मैं एक बूंद छोटी-सी।
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