मुलाक़ात
पहिले मुलाक़ात की तुमसे
फिर इससे। फिर उससे
बहुत खोजा। खोज रही हूँ
लेकिन मिल नहीं पायी हूँ
खुद से
खोज जारी है
वो जो एक पर्दा है।
झीना सा
माया का
मोह का
ममता का
हट नहीं पा रहा है।
लेकिन संकल्प है
एक विश्वास है
कि कभी - न - कभी
होगी मुलाक़ात
खुद से.
निर्मला सिंह
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