निर्मला सिंह का रचना संसार
Home
काव्य संग्रह
कहानी संग्रह
उपन्यास
बाल साहित्य
पुरस्कार
फोटो गैलरी
संपर्क
Wednesday, 26 June 2019
वह औरत
वह औरत
कभी बन जाती है ! कर्क रेखा
तो कभी मकर रेखा
नहीं बन पायी ! अब तक भूमध्य रेखा
जहां उगते हैं सदाबहार वन खुशियों के
और पड़ती है वृक्षों की फुंगियों पर
सुख की चमचमाती धूप
निर्मला सिंह
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment