गुलाब खिलता है
महकता है , सुरक्षित है
अपने चारों ओर कांटों की वज़ह से
उसे दिन-रात एक अभूजा, अनजाना भय
नहीं सताता है। वह नहीं डरता है तेज हवाओं से धूप से, पानी से, रेत से,
क्योंकि कांटे हैं उसके रक्षक
उसके मीत
जो जग के हैं शत्रु
महकता है , सुरक्षित है
अपने चारों ओर कांटों की वज़ह से
उसे दिन-रात एक अभूजा, अनजाना भय
नहीं सताता है। वह नहीं डरता है तेज हवाओं से धूप से, पानी से, रेत से,
क्योंकि कांटे हैं उसके रक्षक
उसके मीत
जो जग के हैं शत्रु
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