Saturday, 29 June 2019

दीये

मैं मिट्टी का दीया हूँ
मुझमें बाती,
तेल डाल कर जलाया जाता है
दूसरा दीया मुझसे जोड़ो,
बाती उसे भी जला देगी
तीसरा दीया जोड़ो,
बाती उसे भी जला देगी
फिर बन जायेगी दीयों की क़तार
फैल जाएगा उजाला
तो मेरे भाई! तुम भी दीया बनो
प्यार, त्याग, विश्वास की मिट्टी का
भाग जाएगा अंधेरा
हिंसा, द्वेष, नफरत का
दूर बहुत दूर।

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