Saturday, 29 June 2019

वक़्त





बन जाता है वक्त सूखी
भुरभुरी सड़क की धूल
जब जब मैं चलती हूं
जिंदगी की सड़क पर
धूल और गुबार ही गुबार आ जाता है
जम जाती है धूल सुखों के वृक्षों पर
उम्मीदों की फुंगियों पर
स्वप्नों की डालियों पर
इंतजार है बारिश का
के जोर से आए।
दुखों की धूल बह जाए
या तेज हवा का झोंका आए
धूल उड़ जाए।

निर्मला सिंह


pic courtesy by

No comments:

Post a Comment