बन जाता है वक्त सूखी
भुरभुरी सड़क की धूल
जब जब मैं चलती हूं
जिंदगी की सड़क पर
धूल और गुबार ही गुबार आ जाता है
जम जाती है धूल सुखों के वृक्षों पर
उम्मीदों की फुंगियों पर
स्वप्नों की डालियों पर
इंतजार है बारिश का
के जोर से आए।
दुखों की धूल बह जाए
या तेज हवा का झोंका आए
धूल उड़ जाए।
भुरभुरी सड़क की धूल
जब जब मैं चलती हूं
जिंदगी की सड़क पर
धूल और गुबार ही गुबार आ जाता है
जम जाती है धूल सुखों के वृक्षों पर
उम्मीदों की फुंगियों पर
स्वप्नों की डालियों पर
इंतजार है बारिश का
के जोर से आए।
दुखों की धूल बह जाए
या तेज हवा का झोंका आए
धूल उड़ जाए।
निर्मला सिंह
pic courtesy by

No comments:
Post a Comment