एक माचिस की तीली हो तुम
एक माचिस की तीली हूं मैं
फ़र्क़ है इतना
कि मैंने जलाए हैं दीये
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों, चर्चों में
और तुमने लगाई है आग
शहर-शहर, गांव-गांव
घरों और दुकानों में
काश! हम दोनों ने एक साथ
जन्म न लिया होता
तब जन्मदात्री मां आज दुखी,
पीड़ित न होती
लेकिन दोष न तुम्हारा है,
न मां का
दोष तो उन हाथों का है
जिन्होंने तुम्हें इस्तेमाल किया।
निर्मला सिंह
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