Wednesday, 26 June 2019

एक -एक लम्हा




एक -एक लम्हा 
एक - एक पल
की कतरनें 
जुड़कर 
सिलती जा रही हैं 
ज़िंदगी की चादर 
कतरनें बचपन की 
जवानी की 
बुढ़ापे की 
चाहत है 
कतरनें  रंगीन, चमकीली,
छींट वाली हों।  

निर्मला सिंह

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